-----कल के उत्तम भविष्य के लिए आज बिजली बचायें ----- उपकरणों के उपभोग के बाद तुरन्त बन्द कर दें ----- आग लगे भवन की बिजली तुरन्त बन्द कर दें ----- अधिक क्षमता वाले बल्बों के स्थान पर कम क्षमता वाले बल्बों का उपयोग करें ----- कम्पैक्ट-लोरेसेन्ट का प्रयोग करें ----- जीवन्त अधिष्ठापन पर कदापि कार्य न करें, बल्कि अधिष्ठापन की बिजली बन्द करके ही कार्य करें ----- एयर कण्डीशन का कम से कम उपयोग करें -----
 
अध्याय-2

 दि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा-161 के अधीन विद्युत से घटित दुर्घटनाओं की जॉच करके आख्या प्रेषित करना:

1.) उत्तर प्रदेश शासन, ऊर्जा अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-46 पी-3-24-2004, दिनांक 09.02.2004 निदेशालय के निम्नलिखित पदधारकों को दि इलेक्ट्रियिटी एक्ट, 2003 की धारा-161 के अधीन विद्युत से घटित दुर्घटनाओं की जॉच करने के लिए प्राधिकृत किया गया है। अधिसूचना की प्रतिलिपि परिशिष्ट-2.1 पर है:-

(क) निदेशक

(ख) संयुक्त निदेशक

(ग) उप निदेशक

(घ) सहायक निदेशक

(च) विद्युत अवर अभियन्ता

2.) भारतीय विद्युत नियमावली, 1956 के नियम-44 (क) के अन्तर्गत विद्युत के उत्पादन एवं पारेशण, वितरण तथा प्रयोग अथवा विद्युत सप्लाई लाइन इत्यादि के सम्बन्ध में कोई दुर्घटना घटित होती है और दुर्धटना के परिणामस्वरूप मानव अथवा पशु जीवन की हानि होती है या होने की सम्भावना हो अथवा किसी मनुष्य या किसी पशु को कोई क्षति होती है तो प्राधिकृत व्यक्ति घातक दुर्धटना धटित होने के बावत सूचना प्रापत होने के 24 घंटे के भीतर एक ’तार‘ रिपोर्ट और सभी दुर्घटना की जानकारी के 48 धंटे के भीतर निर्धारित प्रारूप पर लिखित सूचना निदेशालय के सम्बन्धित कार्यालय को प्रेषित की जानी है।

विद्युत सम्बन्धी घटित दुर्धटनाओं की सूचना निदेशालय के सम्बन्धित कार्यालय को जनता द्वारा भी दी जा सकती है ।

विद्युत से लगने वाली आग से सम्भावित मानव या पशु की हानि के परिपेक्ष्य में समस्त अग्निकांड की जॉच भी विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा की जाती है ।

विद्युत से घटित दुर्घटनाओं तथा अग्निकांड की सूचना सम्बन्धित सहायक निदेशक कार्यालय को नियम-44 (क)में निर्धारित प्रारूप पर दी जानी है ।

3.) विद्युत से घटित दुर्घटनाओं की सूचना प्राप्त होने पर निदेशालय के जोनल कार्यालय द्वारा जॉच की तिथि निश्चित करके उसकी सूचना सप्लायर अथवा विद्युत अधिष्ठापन के स्वामी को दी जाती है। निर्धारित तिथि को स्थल पर दुर्धटना की जॉच की जाती है एवं साक्ष्यों का बयान आदि लिया जाता है। जॉच कार्य पूर्ण हो जाने पर सम्बन्धित जोन के सहायक निदेशक द्वारा जॉच आख्या तैयार करके रीजनल कार्यालय को प्रेषित की जाती है।

4.) रीजनल कार्यालय में दुर्घटना की जॉच आख्या प्राप्त होने पर उसका परीक्षण किया जाता है तथा जॉच आख्या पर अपनी संस्तुति अंकित करके जॉच रिपोर्ट प्रधान कार्यालय, लखनऊ को भेज दी जाती है।

5.) मुख्यालय, लखनऊ में दुर्घटना की जॉच रिपोर्ट प्राप्त होने पर उसका परीक्षण करके जॉच आख्या की प्रतिलिपि निदेशालय की संस्तुति के साथ सप्लायर अथवा विद्युत अधिश्ठापन के स्वामी अथवा अन्य उत्तरदायी व्यक्ति को प्रेशित की जाती है । जॉच आख्या में निम्नलिखित बिन्दुओं पर कार्यवाही अपेक्षित होती है:-

(क) दुर्धटनाग्रसत अथवा प्रभावित व्यक्ति या परिवार को क्षतिपूर्ति करने के सम्बन्ध में।

(ख) विद्युतीय अधिष्ठापन में पायी गयी त्रुटियों को ठीक कराने के लिए भारतीय विद्युत नियमावली, 1956 के नियम-5(4) के अधीन भेजे गये आदेश का अनुपालन किये जाने के सम्बन्ध में ।

(ग) दुर्घटना के लिये उत्तरदायी व्यक्ति के विरूद्ध आवश्यक कार्यवाही किये जाने के सम्बन्ध में ।

विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा उपर्युक्त के अनुसार क्षतिपूर्ति सम्बन्धी संस्तुति दी जाती है तथा क्षतिपूर्ति सम्बन्धी कार्यवाही सप्लायर अथवा विद्युतीय अधिष्ठापनों के स्वामी अथवा दुर्घटना के लिये उत्तरदायी व्यक्ति द्वारा की जाती है।