-----कल के उत्तम भविष्य के लिए आज बिजली बचायें ----- उपकरणों के उपभोग के बाद तुरन्त बन्द कर दें ----- आग लगे भवन की बिजली तुरन्त बन्द कर दें ----- अधिक क्षमता वाले बल्बों के स्थान पर कम क्षमता वाले बल्बों का उपयोग करें ----- कम्पैक्ट-लोरेसेन्ट का प्रयोग करें ----- जीवन्त अधिष्ठापन पर कदापि कार्य न करें, बल्कि अधिष्ठापन की बिजली बन्द करके ही कार्य करें ----- एयर कण्डीशन का कम से कम उपयोग करें -----
परिशिष्ट -6.1

उत्तर प्रदेश इलैक्ट्रिसिटी (ड्यूटी) अधिनियम-1952

(उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या-33, 1952)

द्वारा संशोधित

उ0प्र0 अधिनियम संख्या 27, 1957

उ0प्र0 अधिनियम संख्या 12, 1957

उ0प्र0 अधिनियम संख्या 2, 1957

उ0प्र0 अधिनियम संख्या 10, 1957

उ0प्र0 अधिनियम संख्या 8, 1957

उ0प्र0 अधिनियम संख्या 12, 1957

उ0प्र0 अधिनियम संख्या 11, 1957

उ0प्र0 अधिनियम संख्या 13, 1957

उ0प्र0 अधिनियम संख्या 26, 1957

(उत्तर प्रदेश विधान परिषद ने दिनांक 11 अक्टूबर,1952 ई0 तथा उत्तर प्रदेश विधान सभा ने दिनांक 16 अक्टूबर,1952 ई0 की बैठक में स्वीकृत किया है ।

भारत के संविधान के अनुच्छेद 200 के अन्तर्गत राज्यपाल ने दिनांक 1 दिसम्बर, 1952 ई0 को स्वीकृति प्रदान की और उत्तर प्रदेशीय सरकारी असाधारण गजट में दिनांक 4 दिसम्बर, 2952 ई0 को प्रकाशित हुआ।)

उत्तर प्रदेश एनर्जी (विद्युत शक्ति) के उपभोग(कन्जम्पशन) पर ड्यूटी (शुल्क) लगाने के लिएः-

अधिनियम

यह आवश्यक है कि उत्तर प्रदेश में एनर्जी(विद्युत शक्ति) के उपभोग(कन्जम्पशन) पर ड्यूटी (शुल्क) लगाई जाय, अतएव निम्नलिखित अधिनियम बनाया जाता है:-

अधिनियम-1

(1)- यह अधिनियम उत्तर प्रदेश इलैक्ट्रिसिटी (ड्यूटी) अधिनियम-1952 कहलायेगा।
(2)- इसका प्रसार समस्त उत्तर प्रदेश में होगा ।
अधिनियम-2 - विषय या प्रसंग में कोई बात प्रतिकूल न होने पर, इस अधिनियम में ।
(क)- नियुक्त प्राधिकारी का तात्पर्य:-
 
(1)- उस इलेक्ट्रिसिटी अण्डरटैकिंग(विद्युत व्यवसाय)की दशा में जो ऐसा एनर्जी(विद्युत शक्ति) को सम्भरित करने के कार्य में प्रवृत्त हो, जिसका स्वामी राज्य सरकार हो या जिसका प्रबन्ध राज्य सरकार द्वारा किया जाता हो, ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी (अथारिटी) से है, जिसे इस सम्बन्ध में राज्य सरकार नियुक्त करें , तथा
 
(2)-उस इलेक्ट्रिसिटी अण्डरटैकिंग की दशा में जो ऐसा एनर्जी को सम्भरित करने के कार्य में प्रवृत्त हो जिसका स्वामी केन्द्रीय सरकार या बोर्ड द्वारा किया जाता हो, ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी (अथारिटी) से है, जिसे इस सम्बन्ध में राज्य सरकार केन्द्रीय सरकार अथवा बोर्ड की सहमति से, किसी भी दशा में नियुक्त करें।
 
(3)- इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए सरकार का यह विभाग जो एनर्र्जी (विद्युत शक्ति) की पूर्ति करने(सप्लाई) में प्रयुक्त हो, उक्त प्रकार का इलेक्ट्रिसिटी अण्डर- टेकिंग(विद्युत व्यवसाय) है । स्पष्टीकरणः-- इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए सरकार का यह विभाग जो एनर्र्जी (विद्युत शक्ति) की पूर्ति करने(सप्लाई) में प्रयुक्त हो, उक्त प्रकार का इलेक्ट्रिसिटी अण्डर- टेकिंग(विद्युत व्यवसाय) है ।
(ख)
’’बोर्ड‘‘ का तात्पर्य इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एक्ट, 1948 के अध्याय-3 (Chapter III) के अंतर्गत संधटित बोर्ड से है,
(ग)
’’केन्द्रीय सरकार‘‘का यही अर्थ है जो सेन्ट्रल गवर्नमेंट का जनरल क्लाजेज एक्ट,1897 मे किया गया है,
(घ)
’’उपभोक्ता(कन्ज्यूमर)‘‘का तात्पर्य लाइसेंसी से भिन्न उसे व्यक्ति से जिसे निम्नलिखित द्वारा विद्युत शक्ति दी जाती हो:-
1. कोई लाइसेंसी
2. कोई बोड, अथवा
3. राज्य सरकार(स्टेट गवर्नमेंट) या केन्द्रीय सरकार(सेन्ट्रल गवर्नमेंट)
(ड.)
’’एनर्जी‘‘का तात्पर्य इलेक्ट्रिसिटी एनर्जी (विद्युत शक्ति) से है ,
(च)
’’लाइसेंसी‘‘का तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जिसे एनर्जी के सम्भरण का लाइसेंस इण्डियन इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 1910 के भाग Part II के अधीन प्राप्त हो तथा इसके अन्तर्गत यह व्यक्ति भी है जिसे उक्त एक्ट की धारा-28 के अधीन इस सम्बन्ध में राज्य सरकार की स्वीकृति प्राप्त हो,
(छ)
’’नियर्त‘‘का तात्पर्य इस अधिनियम के अन्तर्गत बने नियमों द्वारा नियत से है,
(ज)
’’लगाई गई दर‘‘के अन्तर्गत किसी मीटर अथवा सर्विस लाइन का किराया नहीं है ,
किन्तु निम्नलिखित उसके अन्तर्गत है -

(1) जब किसी निर्दिष्ट अवधि के भीतर भुगतान करने के लिए छूट दी जाय तो इस प्रकार दी गई छूट,

(2) ( XXX) (उत्तर प्रदेश अधिनियम सं0 2,1971 की धारा-2 निकाल दिया गया है।)

(3) टू पार्ट टैरिफ की दशा में निश्चित मूल्य (फिक्सड चार्जेज)तथा ईकाई मूल्य यूनिट चार्ज) भी,

(4) उस प्रकार के सम्भरण की दशा में जहां मीटर न लगा हो समय-समय पर उसके लिये लगाया गया मूल्य Periodical Charge made there for और,

   

स्पष्टीकरण:- ’’ईकाई‘‘ मूल्य (यूनिट चार्ज) का तात्पर्य खण्ड-3 में वास्तव में उपभुक्त एनर्जी (विद्युत शक्ति)के लिये दिये जाने वाले मूल्य से है ।

(झ)-’’राज्य सरकार(स्टेट गर्वनमेंट‘‘का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सरकार से है ।)-
उन शब्दों तथा पदावलियों का, जिनकी परिभाषा इस अधिनियम में नहीं की गई है किन्तु जो इण्डियन इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 1910 में परिभाषित है, वही अर्थ होगा जो उक्त अधिनियम में नहीं की गयी है किन्तु जो इण्डियन इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 1910में परिभाषित है, वही अर्थ होगा जो उक्त अधिनियम में उन्हें दिया गया है ।
अधिनियम-3 -(1) आगे दिये गये उपबन्धों के अधीन रहते हुये:
(क)
किसी लाइसेंसी, बोर्ड, राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा किसी उपभोक्ता कोबेची गयी एनर्जी, या
(ख)
किसी लाइसेंसी, या बोर्ड द्वारा वाणिज्यिक आवासिक प्रयोजनों के लिये प्रयोग किये जाने वाले भू-गृहादि में अथवा किसी अन्य भू-गृहादि में, अपने बर्क्स के निमार्ण, बनाये जाने या चलाने से भिन्न प्रयोजनों के लिये उपभुक्त एनर्जी, या
(ग)
किसी अन्य व्यक्ति द्वारा विद्युत जनन के अपने श्रोत से उपभुक्त एनजी्र पर एक ड्यूटी (जिसे आगे ’’इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी) कहा गया है) लगाई जायेगी और जिसका भुगतान राज्य सरकार को किया जायेगा और ऐसी दरों पर निर्धारित की जायेगी जिसे राज्य सरकार समय-समय पर गजट में विज्ञप्ति द्वारा निश्चित करें और ऐसी दर या तो चार्ज की दर के निर्दिष्ट प्रतिशत के रूप में या प्रति यूनिट निर्दिष्ट धनराशि के रूप में निश्चित की जा सकती है ।

Provided that such notification issued after October 1, 1984 but not later than March, 1985 may be made effective on or from a prior date not earlier than October 1, 1984.

(2)उपधारा-(1) के खण्ड-क और ख के सम्बन्ध में इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी चार्ज की दर के पचास प्रतिशत से अधिक न होगी
(’’किन्तु प्रतिबन्ध यह हे कि वन पार्ट टैरिफ की दशा में जहां कि भारित दरउपयोग के यूनिट पर आधारित हो यहां इलैक्ट्रिसिटी ड्यूटी प्रति यूनिट एक पेैसे कम या प्रति यूनिट नौ पैसे से अधिक न होगी ‘‘)
स्पष्टीकरण:- उपयुर्क्त इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए लाइसेंसी या बोर्ड द्वारा उपभुक्त अथवा उसके या अपने भागीदारों निदेशकों, सदस्यों, अधिकारियों या सेवकों को निःशुल्क अथवा रियायती दरों पर सम्भरित एनर्जी यथास्थिति, लाइसेंसी या बोर्ड द्वारा उपभोक्ताओं को, उसी श्रेणी के अन्य उपभोक्ताओं के सम्बन्ध में लागू दरों पर बेची गयी एनर्जी समझी जाय ।
(3)- उपधारा-(1) के खण्ड(ग) के सम्बन्ध में इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी प्रति यूनिट एक पैसे से कम या छः पैसे से अधिक न होगी ।
(4) राज्य सरकार, लोक हित में, किसी क्षेत्र में एनर्जी के सम्भरण के लिये वर्तमान मूल्यों की किसी संय़ंत्र की विद्युत जनन क्षमता को औद्यौगिक उत्पादन की सामान्यतया अथवा उसके किसी निर्दिष्ट वर्ग को बढ़ाने की आवश्यकता को और किसी अन्य सुसंगत बात को ध्यान में रखते हुये या तो एनर्जी के विभिन्न वर्गो के उपभोग के सम्बन्ध में इलेक्ट्रिसिटी की विभिन्न दरें निश्चित कर सकती है अथवा उसका भुगतान करने से कोई भी छूट दे सकती है ।
(5) निम्नलिखित पर कोई इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी नहीं लगाई जायेगी:
(क)केन्द्रीय सरकार द्वारा उपभुक्त अथवा केन्द्रीय सरकार द्वारा उपभोग किये जाने के लिये उस सरकार को बेची गई एनर्जी या
(ख) XXX उ0प्र0 अधिनियम सं011, 1985 (दिनांक 01.10.1984 से प्रवृत्त)द्वारा निकाला गया)
(ग) किसी रेलवे के निर्माण बनाये रखने या चलाने में उपभोग के लिये उस सरकार को बेची गयी एनर्जी:

(घ) किसी कृषक (Cultivator) द्वारा ऐसे कृषि कार्यों Crushing, Milling and treating में जो उसके खेतों पर या उनके निकट या पेरना, पीसना या उपभोग के लिये अन्य क्रिया करना या चारा काटना ।

(ड़) जनता सर्विस कनेक्शन योजना के अधीन किये गये सम्भरण पर रोशनी के लिये उपभुक्त एनर्जी । स्पष्टीकरण: खण्ड(ड) के प्रयोजनों के लिये ’’जनता सर्विस कनेक्शन योजना‘‘ का तात्पर्य राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित जिलों में हरिजनों, भूमिहीन श्रमिकों, कृषको (जिनके पास एक एकड़ से अधिक भूमि न हो) सशस्त्र बल के सदस्यों (चाहें सेवारत हों या सेवानिवृत्ति हों), युद्ध विधवाओं और निर्बल बर्गो को एनर्जी के सम्भरण के लिये उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिशद द्वारा अनुमोदित योजना से है ।’’
अधिनियम-3(क) XXX उ0प्र0 अधिनियम सं0 8, 1975 की धारा 4 द्वारा निकाला गया)
अधिनियम-4 (1) इलक्ट्रिसिटी ड्यूटी ऐसी रीति से तथा ऐसी अवधि के भीतर, जो नियत की जाये,
राज्य सरकार को निम्नलिखित के द्वारा दी जायेगी:
(क) जब एनजी लाइसेंसी द्वारा समभरित या उपभुक्त की जाय तो लाइसेंसी द्वारा:
(ख) जब एनर्जी, राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा सम्भरित की जाये अथवा बोर्ड द्वारा सम्भरित या उपभुक्त की जाये, तो नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा और
(ग) जब एनर्जी किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अपने ही विद्युत जनन श्रोतों से उपभुक्त की जाय तो एनर्जी जनित करने वाले व्यक्ति द्वारा ।
(2) यदि उपर्युक्त के अनुसार नियम अवधि के भीतर राज्य सरकार को इलेक्ट्रिसिटी की ड्यूटी की धनराशि का भुगतान न किया जाय तो यथास्थिति लाइसेंसी, बोर्ड या उपधारा-(1) के खण्ड(ग) में उल्लिखित व्यक्ति उस इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी की धनराशि पर जिसका भुगतान न किया गया हो, अट्ठारह प्रतिशत प्रतिवर्श की दर से, ऐसी अवधि की भीतर जो नियत की जाये, तब तक ब्याज को देनदार होगा जब तक कि उसका भुगतान न कर दिया जाये ।
अधिनियम-4(क)(1) किसी लाइसेंसी, राज्य सरकार, केन्द्रीय सरकार या बोर्ड द्वारा किसी उपभोक्ता की सम्भरित एनर्जी पर धारा-3 के अधीन देय इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी की धनराशि यथा स्थिति लाइसेंसी या नियुक्त प्राधिकारी द्वारा उपभोक्ता से वसूल की जा सकती है ।
(2) उपभोक्ता से इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी की धनराशि वसूल करने के उद्देष्य से यथास्थिति लाइसेंसी या नियुक्त प्राधिकारी वसूल की किसी अन्य रीति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना इण्डियन इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 1910 की धारा-24 की उपधारा-1 के अधीन लाइसेंसी को प्राप्त अधिकारों को प्रयोग कर सकता है, मानों कि उक्त ड्यूटी ऐसे उपभोक्ता को सम्भरित एनर्जी के सम्बन्ध में चार्ज अथवा देय धनराशि हो ।
अधिनियम-4(ख) (1) यदि तदर्थ नियम किसी प्राधिकारी की राय में इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के लिये देनदार लाइसेंसी, बोर्ड या अन्य व्यक्ति ड्यूटी देने से छलपूर्वक बचता है अथवा बेचने का प्रयास करता है, चाहे वह ऐसा मिथ्या अभिलेख रखकर मिथ्या विवरणियों को प्रस्तुत करके, सम्भरित या उपभुक्त एनर्जी को छिपाकर अथवा किसी अन्य उपाय से करता हो, तो यथास्थिति लाइसेंसी, बोर्ड या अन्य व्यक्ति ऐसे समय के भीतर जो नियत किया जाय, उक्त ड्यूटी के अतिरिक्त दण्ड के रूप में ऐसी ड्यूटी की, जिसे छलपूर्वक बचाया गया हो, अथवा जिसे बचाने का प्रयास किया गया हो, धनराशि के
चार गुने से अनधिक ऐसी धनराशि का भुगतान करेगा जो उक्त प्राधिकारी द्वारा अवधारित की जाय प्रतिबन्ध यह है कि लाइसेंसी, बोर्ड या अन्य व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर दिये बिना इस उपधारा के अधीन कोई कार्यवाही न की जायेगी ।
 
(2) उपधारा(1) के अधीन दिये गये आदेश के विरूद्ध अपील ऐसे प्राधिकारी को, ऐसी अवधि के भीतर और ऐसा शुल्क देने पर, जो नियत किये जाय, की जायेगी ।

(3) अपीलीय प्राधिकारी उस आदेश को जिसके विरूद्ध अपील की गयी हो पुष्टि कर सकता है, और अपील का निस्तारण होने तक आदेश का कार्यान्वित किया जाना पूर्णतः या अंशतः और ऐसी शर्तो पर जो वह उचित समझे, स्थगित कर सकता है।

अधिनियम-5 -(1)यदि राज्य सरकार सामान्य अथवा विशेष आज्ञा द्वारा ऐसा निर्देष करे, तो लाइसेंसी अथवा नियुक्त प्राधिकारी (अथवा इलक्ट्रिसिटी ड्यूटी के लिये देनदार अन्य व्यक्ति) ऐसे अभिलेख ऐसी रीति तथा ऐसे आकार में रखेगा, जो नियत किये जाय और जिनमें निम्नलिखित प्रदर्शित होगेः

(क)
परिक्षण या सम्भरण के लिये उत्पन्न की गयी अथवा प्राप्त एनर्जी (विद्युत शक्ति) की इकाइंया (यूनिट्स),
(ख)
उपभेक्ता को दी गयी एनर्जी(विद्युत शक्ति) की इकाइंया (यूनिट्स) अथवा उसके द्वारा उपभुक्त इकाइयां,
(ग)
प्रत्येक श्रेणी के उपभोग पर अलग-अलग देय इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी की धनराशि और धारा-4-क के अधीन वसूल की गई धनराशि (क-क) धारा-4 के अधीन देय ब्याज की धनराशि, यदि कोई हो, और धारा-4ख के अधीनअवधारित दण्ड शुल्क शुल्क की धनराशि यदि कोई हो,
(घ)
अन्य ऐसे ब्यौरे जो नियत किये जायें ।

(2) प्रत्येक व्यक्ति जिसे उपधारा-1 के अधीन अभिलेख रखने का निर्देष दिया गया हो ऐसे नक्शे, ऐसे आकार और रीति में ऐसे प्राधिकारी को और ऐसी अवधि के भीतर प्रस्तुत करेगा जो नियत किये जायें ।

अधिनियम-6- (1) राज्य सरकार, सरकारी गजट में विज्ञप्ति द्वारा धारा 5 के अधीन रखी अभिलेखों का निरीक्षण करने के लिए,निरीक्षण अधिकारी Inspecting officer नियुक्त कर सकती है ।

(2)
इस अधिनियम तथा नियमों के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिये निरीक्षण अधिकारी ऐसे कार्य करेंगें और इस अधिकारों को प्रयोग में लायेंगें जिन्हें समय-समय पर निश्चित किया जाये ।
(3)
इस धारा के अधीन नियुक्त प्रत्येक निरीक्षणाधिकारी इण्डियन पैनल कोर्ट, 1860 की धारा-21 अर्थ में पब्लिक सर्वेन्ट (जनसेवक) समझा जायेगा ।
अधिनियम-7 (1) यदि धारा 3, या धारा-4, या धारा-4(ख) के अधीन इलेक्क्ट्रिसिटी ड्यूटी या ब्याज अथवा दण्ड शुल्क के मुद्दे देय कोई धनराशि, नियत अवधि के भीतर राज्य सरकार को अदा न कर दी गयी हो तो वह मालगुजारी बकाया के रूप में निम्नलिखित से वसूल की जा सकेगीः-
(क)
लाइसेंसी द्वारा सम्भरित या उपभुक्त इनर्जी की दशा में लाइसेंसी से ,
(ख)
बोर्ड द्वारा सम्भरित या उपभुक्त इनर्जी की दशा में बोर्ड से, और
(ग)
एनर्जी जनन करने वाले किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उपभुक्त एनर्जी की दशा में उस व्यक्ति से जो इस अधिनियम के अधीन उक्त ड्यूटी का देनदार हो।
(2) उपधारा-(1) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना राज्य सरकार-
(क)
किसी लाइसेंसी या बोर्ड द्वारा उपर्युक्त प्रकार से देय किसी धनराशि का दशा, उक्त धनराशि की किसी ऐसी धनराशि को किसी ऐसी धनराशि में से काट सकते हैं जो राज्य सरकार द्वारा लाइसेंसी या बोर्ड को देय हो, या
(ख)
किसी लाइसेंसी द्वारा उपयुकर्त प्रकार से देय धनराशि की दशा में बोर्ड से यह अपेक्षा कर सकती है कि वह उक्त धनराशि को किसी ऐसी धनराशि में से काट लें जो उसके द्वारा लाइसेंसी को देय हो और इस प्रकार काटी गयी धनराशि राज्य सरकार को दे दें
अधिनियम-8(1) -(1)यदि कोई व्यक्ति-
(क)
जिसे धारा-5 के अनुसार अभिलेख रखना तथा नक्शे प्रस्तुत करना आवश्यक हो, उन्हें नियत रीति से अथवा नियत आकार में रखने में अथवा प्रस्तुत करने मे असफल रहता है,
(ख)
धारा-6 के अन्तर्गत नियुक्त किसी निरीक्षणाधिकारी के इस अधिनियम तथा नियमों के अन्तर्गत अधिकार प्रयोग तथा कृतव्य पालन में जानबूझ कर बाधा डालता है, अथवा
(ग)
किसी नियम का उल्लंघन करता है तो वह किसी मजिस्ट्रेट द्वारा अभिशप्त होने पर अर्थदण्ड का भागी होगा जो दो सौ रूपये से अधिक न हो । (On conviction) अर्थदण्ड का भागी होगा जो दो सौ रूपये से अधिक न हो ।
(2)
यदि कोई व्यक्ति धारा-5 में उल्लिखित कोई ऐसा अभिलेख रखता है या कोई ऐसा नक्शा प्रस्तुत करता है, जिसके सम्बन्ध में उसे यह जानकारी हो या विश्वास करने का कारण हो कि वह किसी सारवान विवरण में मिथ्या है, अथवा सत्य नहीं है, तो वह अर्थदण्ड का भागी होगा जो एक हजार रूपये से अधिक न होगा ।
8-(क)
कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का संज्ञान तब तक न करेगा, जब तक कि किसी ऐसे अधिकारी द्वारा जो नियत किया जाय, फरियाद न किया जाये ।
8(ख)-
(1)यदि इस अधिनियम के अधीन अपराध करने वाला व्यक्ति कोई कम्पनी हो, तो कम्पनी और उसके साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति भी, जो अपराध किये जाने के समय कम्पनी का कारोबार चलाने के निमित्त उसका प्रभारी हो, और उसके प्रति उत्तरदायी हो, अपराध करने का दोशी समझा जायेगा और उसके विरूद्ध कार्यवाही की जा सकेगी तथा तद्नुसार दण्ड दिया जा सकेगा ।
प्रतिबन्ध यह है कि इस उपधारा की किसी बात से कोई ऐसा व्यक्ति किसी दण्ड का भागी न होगा यदि वह सिद्ध कर दें कि अपराध उसके जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने उस अपराध को रोकने के लिये सभी प्रकार की यथोस्थिति सावधानी बरती थी ।
(2) उपधारा-(1) में किसी बात के होते हुये भी, यदि इस अधिनियम के अधीन अपराध किसी, कम्पनी द्वारा किया गया हो, और यह सिद्ध हो जाये कि अपराधा कम्पनी के किसी मैनेजिंग एजेंट, सेक्रेटीज और ट्रेजरार्स, निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति से या उसकी मौन अनुमति से हुआ है, अथवा यह कि अपराध उसकी ओर से किसी उपेक्षा के कारण हुआ है तो वह मैनेजिंग एजेंट, सेक्रेटीज, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जायेगा और उसके विरूद्ध कार्यवाही की जा सकेगी तथा उसे तद्नुसार दण्ड दिया जा सकेगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिये -
(क)
-‘कम्पनी’ का तात्पर्य किसी नियमित निकाय से है, और इसके अन्तर्गत कोई भी फर्म या व्यक्तियों का अन्य संघ भी है, और
(ख)
किसी फर्म के सम्बन्ध में ’’निदेशक‘‘ का तात्पर्य फर्म के किसी भागीदार से है।
8-(ग)-
इस अधिनियम या तद्धीन बनाये गये किसी नियम अथवा दिये गये किसी आदेश के किसी उपबन्ध के अनुसरण में सद्भावना से किये गये अथवा किये जाने के लिये अभिप्रेत किसी काय्र के सम्बन्ध में राज्य सरकार के किसी अधिकारी या सेवक के विरूद्ध कोई भी वाद, अभियोजन अथवा अन्य विधिक कार्यवाही नहीं की जा सकेगी ।
अधिनियम-9- (XXX उ0प्र0 अधिनियम सं0 2,1971 की धारा 10 द्वारा निकाला गया)
अधिनियम-10 - -
(1)
राज्य सरकार गजट में विज्ञप्ति द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिये नियम बना सकती है ।
(2)
विशेषता और पूर्वेक्त अधिकानर की वयापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित की व्यवस्था की जा सकती है:
(क)
रीति जिसके अनुसार तथा अवधि जिसके भीतर धारा-4 के अधीन इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी या उसके ब्याज का भुगतान राज्य सरकार को किया जायेगा ।
(ख)
प्रपत्र जिसमें और रीति जिसके अनुसार, धारा-5 की उपधारा-(1) के अधीन अभिलेख रखे जायेगें और विवरण जो उनमें दिये जायेंगें ।
(ग)
प्रपत्र जिसमें और रीति जिसके अनुसार अवधि जिसके भीतर और प्राधिकारी जिसे, धारा-5 की उपधारा-
(घ)
रीति जिसके अनुसार धारा-5 की उपधारा-(1) के दण्ड(क) और (ख) के प्रयोजनों के लिये एनर्जी की ईकाइयां सुनिश्चित की जायेंगीं ।
(ड)
कर्तव्य जिनका पालन और अधिकार जिनका प्रयोग धारा 6 के अधीन नियुक्त निरीक्षण अधिकारी करेगें।
(च)
प्रधिकारी जो धारा-4-(ख) की उपधारा-1 के अधीन देय शास्ति अवधारित करेगा ओैर अवधि जिसके भीतर इसका भुगतान किया जायेगा ।
(छ) प्राधिकारी जिसे अवधि जिसके भीतर और शुल्क जिसके दिये जाने पर, धारा-4-(ख) की उपधारा-(2) के अधीन कोई अपील की जा सकेगी । ’’रीति से जिससे धारा-4ख की उपधारा-2 के अधीन कोई अपील दाखिल की जायेगी और उसे निस्तारित करने की प्रक्रिया ’’
(ज)
प्राधिकारी जो इस अधिनियम के अधीन अभियोजन के लिये परिवाद कर सकते हैं,
(झ)
कोई अन्य विषय जिसे नियत किया जाना हो या नियत किया जा सके ।
(3) इस अधिनियम के अधीन बनाये गये समस्त नियम, बनाये जाने के पश्चात यथाशाक्य शीध्र, राज्य विघानमण्डल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब उसका सत्र हो रहा हो उसके एक सत्र में या एक से अधिक अनुकामिक सत्रों में कुल 14 दिन की अवधि पर्यनत रखे जायेंगें, और जब तक की कोई वाद का दिनांक निश्चित न किया जाये, गजट में प्रकाशित होने के दिनांक से, ऐसे परिष्कारों या अभिशून्यनों के अधीन रहते हुये प्रभावी होंगें जो विधान मण्डल के दोनों सदन उक्त अवधि के भीतर करने के लिये सहमति हों । किन्तु इस प्रकार के किसी परिष्कार या अभिशून्यन का सम्बद्ध नियमोंके अधीन पहले की गई किसी बात की वैघता पर प्रतिकूल प्रभाव न पडे़गा ।