-----कल के उत्तम भविष्य के लिए आज बिजली बचायें ----- उपकरणों के उपभोग के बाद तुरन्त बन्द कर दें ----- आग लगे भवन की बिजली तुरन्त बन्द कर दें ----- अधिक क्षमता वाले बल्बों के स्थान पर कम क्षमता वाले बल्बों का उपयोग करें ----- कम्पैक्ट-लोरेसेन्ट का प्रयोग करें ----- जीवन्त अधिष्ठापन पर कदापि कार्य न करें, बल्कि अधिष्ठापन की बिजली बन्द करके ही कार्य करें ----- एयर कण्डीशन का कम से कम उपयोग करें -----

अध्याय-7

विवादित इनर्जी मीटर का परीक्षण

1. उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड, 2005 की धारा-5.6 की उपधारा-(सी) (iii) के अधीन उपभोक्ता चाहें तो अपने विवादित मीटर की परिशुद्धता का परीक्षण विद्युत निरीक्षक से करा सकता है ।

 

2. विद्युत निरीक्षक से मीटर का परीक्षण कराने के लिये उपभोक्ता को मीटर का पूर्ण विवरण अथवा सीलिंग सर्टिफिकेट की प्रतिलिपि के साथ अपना प्रार्थना पत्र निदेशक,  विद्युत सुरक्षा के लखनऊ कार्यालय को भेजना चाहिये और इसकी सूचना सप्लायर के सम्बन्धित अधिकारी को दी जानी चाहिये ।

 

3. मीटर का परीक्षण शुल्क शासकीय विज्ञप्ति संख्या- 1435-पी-3/98-24-47पी/91, दिनांक 29जून, 1998 के मानक्रम ’’ड‘‘ में निर्धारित है ।

 

4. यदि विवादित मीटर उपभेाक्ता के परिसर से उतारा जा चुका हो, उस दशा में मीटर का परीक्षण विद्युत सुरक्षा निदेशालय के मुख्यालय में स्थित परीक्षण प्रयोगशाला में किया जाय । मीटर का परीक्षण दोनों पक्षों की उपस्थिति में किया जाय ।

 

5. विवादित मीटर यदि उपभोक्ता परिसर पर ही लगा है, उस दशा में मीटर का परीक्षण निदेशालय द्वारा स्थल पर ही किया जा सकेगा । इसके लिये उपभोक्ता को निदेशालय के अधिकारी/कर्मचारियों के आने जाने का यात्रा भत्ता कोषागार में जमा करना होगा। स्थल पर मीटर के परीक्षण के लिये यह आवश्यक होगा कि विद्युत आपूर्ति तथा लोड हो । यदि विद्युत आपूर्ति काटी जा चुकी है, उस दशा में मीटर उतारकर निदेशालय के मुख्यालय लखनऊ स्थित प्रयोगशाला में ही किया जायेगा । मीटर उतारकर परीक्षण शुल्क लाने की जिम्मेदारी सप्लायर की होगी ।

 

6. इनर्जी मीटर के परीक्षण से सम्बन्धित परीक्षण शुल्क तथा यात्रा भत्ता की धनराशि का भुगतान उत्तर प्रदेश के किसी कोषागार में निम्नांकित लेखाशीर्षक के अन्तर्गत किया जायेगा ।

’’0043- बिजली पर कर और शुल्क,

800- अन्य प्राप्तियां‘‘ ।