-----कल के उत्तम भविष्य के लिए आज बिजली बचायें ----- उपकरणों के उपभोग के बाद तुरन्त बन्द कर दें ----- आग लगे भवन की बिजली तुरन्त बन्द कर दें ----- अधिक क्षमता वाले बल्बों के स्थान पर कम क्षमता वाले बल्बों का उपयोग करें -----कम्पैक्ट-लोरेसेन्ट का प्रयोग करें ----- जीवन्त अधिष्ठापन पर कदापि कार्य न करें, बल्कि अधिष्ठापन की बिजली बन्द करके ही कार्य करें ----- एयर कण्डीशन का कम से कम उपयोग करें -----

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परिचय

विद्युत सुरक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश शासन, ऊर्जा विभाग, उत्तर प्रदेश के अधीन एक आयोजनेत्तर विभाग है, जिसका प्रधान कार्यालय विभूति खण्ड-2, गोमती नगर, लखनऊ में स्थिति है। प्रदेश में 11 रीजनल कार्यालय एवं 38 जोनल कार्यालय हैं। निदेशालय के संगठन का विवरण परिशिष्ट 1.1 में दिया गया है। निदेशक, विद्युत सुरक्षा ’’दि इलैक्ट्रिसिटी एक्ट 2003‘‘ की धारा-162 के अन्तर्गत प्रदेश के ’’इलेक्ट्रिसिटी इन्सपेक्टर‘‘ नियुक्त है। निदेशक, विद्युत सुरक्षा ’’बोर्ड ऑफ इक्जामिनर्स (इलैक्ट्रिसिटी)‘‘ के पदेन अध्यक्ष भी हैं। विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा सम्पादित होने वाले मुख्य कार्य निम्न प्रकार है:-

1. दि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा-161 के अधीन विद्युत से घटित दुर्घटनाओं की जॉच करके आख्या प्रेषित करना।

2. भारतीय विद्युत नियमावली, 1956 के नियम-45 के अधीन विद्युतीय अधिष्ठापनों का प्रारम्भिक तथा नियतकालिक निरीक्षण करना।

3. भारतीय विद्युत नियमावली, 1956 के नियम-45 के अधीन विद्युत सम्बन्धी कार्य करने के लिए ठेकेदार लाइसेंस, सुपरवाइजर सर्टिफिकेट तथा वायरमैन परमिट प्रदान करना एवं उनका नवीकरण।

4. इलेक्ट्रिकल सुपरवाइजर सर्टिफिकेट तथा वायरमैन परमिट प्रदान करने के लिए परिक्षायें आयोजित करना।

5. विद्युत शुल्क के भुगतान से सम्बन्धित खातों की जॉच तथा भुगतान का अनुश्रवण।

6. उ0 प्र0 डिस्ट्रब्यूशन कोड, 2005 के अंतर्गत विवादित इनर्जी मीटर्स का परीक्षण करना।

7. मेला, प्रदर्शनी तथा अन्य सार्वजनिक व विशिष्ट व्यक्तियों के कार्यक्रमों से सम्बन्धित विद्युतीय अधिष्ठापनों का निरीक्षण।